NaPoWriMo (# 19): Why have you gone away..

The sky weeps,
In, the melancholy, seeps.
Lonely night and a dull day,
View from the window is all grey.
Why have you gone away?
 The bare bough cries,
As last of its green dies.
In sorrow, the yellowed leaves lay,
Oh, why have you gone away?
 My heart bleeds,
On, sadness it feeds.
I can not help feeling blue…
Oh come back now…
and take me away with you.
 
 

 

 

 

उम्र-कैद

असत्य के जाल में बंध कर,
अविश्वास की बेड़ियों में उलझ कर,
ईर्ष्या की अग्नि में झुलस कर,
आक्रोश की आंधी में अटक कर,
अपने आस्तित्व को ,
गुंथा लेते हैं सभी,
कहाँ उन्मुक्त हो कर,
उल्हास आने देते हैं सभी?
अपनी ही बनाई सीमाओं में,
बंदी हो जाते हैं सभी,
व्यर्थ ही अपना जीवन
उम्रकैद बना लेते हैं सभी…..

उमड़ घुमड़…

उमड़ घुमड़ कर बादल छाये
संग उनके विचार भी उफनाये
आधे- अधूरे , कच्चे- पक्के
कुछ कचोटते तो कुछ मुस्काते
कुछ आंसू लाते तो कुछ गुदगुदाते
कलम मेरी रुक रुक जाये
क्या लिखूं ऐसा..
जो सभी को भा जाये
सच्चे भाव …….
पर जो न मुझे रुलाए
न किसी और का मन दुखाएं
सभी मेरे अपने हैं
जिनसे दुःख-सुख के
क्षण सभी जुड़े हैं
उनके हाथों में कुछ नहीं…
सारे पल,इश्वर ने गढ़े हैं…
ऐ बादल…..
अपनी बूंदों में बहा
आंसूं सारे ले जा…
कर दे मेरा मन भी हरा…
कर दे मेरा मन भी हरा….