Zindagi me nazariye badal gaye hain….

Corona pandemic has forced each of us to rethink what is important in life…
Money or loved ones?
Desire to conquer the world or have another peaceful and free morning…
A Hindi poem for the changing attitude towards life…

ख्वाब बदल गए हैं
मर्जियां बदल गई हैं
जिंदगी को देखने के
अब नज़रिए बदल गए हैं…

कल तक थी आस
नाम की
शोहरत की
पहचान की
दौलत की…
देखते कहां थे हम
कौनसी कली खिली है
कौन मुई चिड़िया चहकी थी
लगे हुए थे एक दौड़ में
आज को भूल, कल की होड़ में

कैसा फिर है अब समय चक्र देखो
नहीं चिंता पैसे की
कपड़े की
ना छप्पन भोग की…
आज बैठे हैं सुन्न
सहमे हुए हाथ जोड़े
आस है तो सिर्फ
एक और सुबह की
एक और लम्हे की
अपनों के संग
गले लगने की
कभी ना बिछड़ ने की
फिर से मिलने की
संग हसने रोने झगड़ने की
पीठ थपथपाने की
रूठने मनाने की
ललक है ज़िन्दगी की…

सच ख्वाब बदल गए हैं
अब नज़रिए बदल गए हैं…

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